Tuesday, January 10, 2012

मुनाफे में हैं डिस्कॉम, तो क्यों है घाटे का रोना!

नई दिल्ली ।। पिछले एक साल से बिजली कंपनियां लगातार घाटे में होने का रोना रो रही हैं और इसी आधार पर बिजली टैरिफ भी 22 फीसदी बढ़ाया गया। लेकिन दस्तावेज बताते हैं कि बिजलीकंपनियां घाटे में नहीं बल्कि फायदे में हैं। बिजली कंपनियां यह दलील देती रहीं कि बिजली के दाम बढ़े हैं इसलिए टैरिफ बढ़ाना जरूरी है लेकिन पावर एक्सचेंज के आंकड़ों से साफ है कि पिछले तीनसाल में बिजली के दाम बढ़े नहीं बल्कि घटे हैं। 

50 फीसदी से भी कम हुए दाम 
बिजली टैरिफ बनाते वक्त बिजली कंपनियों ने कहा था कि बिजली के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और बिना टैरिफ बढ़ाए वह सरवाइव नहीं कर सकते। इसी आधार पर डीईआरसी ने टैरिफ बढ़ाया था। लेकिनपावर एक्सचेंज के आंकड़े देखें तो बिजली कंपनियां जो बिजली खरीद रही हैं उसके दाम 50 फीसदी से भी कम हुए हैं। सीईआरसी के अप्रूवल के बाद 2008 में पावर एक्सचेंज बना था। पहले साल बिजलीके दाम ज्यादा थे। तब एवरेज रेट 7.51 रुपये प्रति किलोवॉट था। 2009 में यह घटकर 6.03 रुपये हो गया। 2010 में 3.64 रुपये और 2011 में 3.31 रुपये था। एक्टिविस्ट अनिल सूद ने कहा किबिजली कंपनियों ने दाम बढ़ाने का जो आधार बनाया था वह आधार ही खोखला था। आश्चर्यजनक यह है कि डीईआरसी ने सारे फैक्ट क्यों नहीं जांचे। सवाल उठता है कि डीईआरसी और दिल्ली सरकारको बिजली कंपनियां बेवकूफ बना रही हैं या फिर ये सब मिलकर पब्लिक को धोखा दे रहे हैं ?


with thanks : NBT : link in headline above for detailed news.

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