Sunday, June 16, 2019

The Game of Fixed Charges by AAP !

This is how you do the projections? 264 + 73% +73% = 760? Strange & shocking. Your govt hiked the Fixed charges by 6 to 10 TIMES in just 4 years. Why don't you do the projection of Fixed charges for the next 6 to 8 years on the above basis and share the outcome?

Just let us know how much you pay to the DISCOMs for a 1kW connection with 50 units of consumption? If a consumer pays 128, the balance is paid by you to the DISCOMs out of the subsidy collected from hard earned money of the same set of people. In such a case how the power is cheaper in Delhi while DISCOMs get the full booty?

Strange n shocking. You have shown the projections from 1kW to 5kW only and only up to 400 units which are covered by your subsidy. Still, your projections clearly show that people are paying MORE over n above the 1kW of sanctioned load due to the hike of Fixed charges, while DISCOMs also get Rs 1700 cr as subsidy and you still say you have not hiked the power tariff in Delhi?

Why you have not shared the projections of power consumption of over 400 units with sanctioned load of over n above 5kW, 10kW, 15kW, 25kW, 50kW? This will surely give a clear picture of how much hike has been done by you in the Fixed charges.

In the last 4 years, you hiked the fixed charges by 6 to 10 times in Delhi. Now you have announced that Fixed charges will be reduced back to the normal. But whats about Rs 4709 crore collected by DISCOMs in the last 12 months? If it was not a deal or a gift to the DISCOMs, why don't you ask DISCOMs to refund the booty collected by them in 12 + 4 = 16 months till July,  to the consumers immediately?

Truly the burden of subsidy has remained constant on the shoulders of the consumers as one part is paid by the consumers and the balance is paid by you as a subsidy, out of the hard earned money of the consumers, while DISCOMs get the total amount

Have you proceeded to the SC for the CAG audit of DISCOMs so that truth could come forward, Tariff could be slashed, the subsidy could be saved for relief to the consumers?

B S Vohra

Saturday, June 15, 2019

Fixed Charges - आपकी अपनी रिपोर्ट आप को ही आईना दिखा रही है.

केजरीवाल साहिब,

दो दिन पहले आपने दिल्ली की जनता के सामने एक चार्ट पेश किया दिल्ली के पोवेर टॅरिफ को लेकर. 


मेरे कुछ सवाल हैं आपसे इस बारे मे:

1. क्या आप के यहाँ पोवेर टॅरिफ का प्रोजेक्षन इसी तरह से होता है कि अगर 2010 से 2013 मे किसी भी वजह से पोवेर टॅरिफ मे 70 - 72% का इज़ाफा हुआ था,  तो 2013 से 2016 और 2016 से 2019 मे भी उसी रेट पर इज़ाफा होगा?  

अगर आपका यही सिस्टम है तो क्या ये समझा जाए की आपने जो फिक्स्ड चार्जस के टॅरिफ मे 6 से 10 गुना का इज़ाफा किया था, अगले 6 सालों मे, आपकी पॉलिसी की तर्ज पर, ये इज़ाफा 18 से 30 गुना का हो जाएगा,  यानी की दिल्ली की जनता को 18 से 30 गुना का फिक्स्ड चार्ज देना पड़ेगा?  

और अगर आप ये बोलते हैं की वो इज़ाफा तो आप जुलाइ मे वापिस ले लेंगे, तो फिर पिछले 15 महीनों से दिल्ली वाले जो फिक्स्ड चार्जस का भारी भरकम लोड उठा रहे थे, उसका क्या होगा? क्या वो आपकी तरफ से डिस्कोमस को कोई गिफ्ट था? कोई डील थी? कोई समझोता था? अगर नहीं तो उस पैसे को, उस लगभग 5 से 7000 क्रोर की भारी भरकम रकम को वापिस दिलवाइए. 

2. आपने यह तो बोल दिया की दिल्ली मे बिजली के रे सबसे सस्ते हैं और उसे दर्शाने के लिए आपने 50 यूनिट्स का बिल 128 रुपये दिखा दिया. मैं आपसे यह पूछना चाहता हूँ की बिजली कंपनीज़ को आप किस रेट  पर पेमेंट करते हैं? अगर आप उपभिक्ता से 50 यूनिट्स के 128 रुपये लेते हैं तो क्या बिजली कंपनीज़ को भी आप 50 यूनिट्स के 128 रुपये देते हैं? अगर ऐसा है तो 1700 क्रोरे की सब्सिडी किस बात की दी जाती है? 

मैं आपसे पूछना चाहता हूँ की वो 1700 क्रोरे की सब्सिडी क्या आप अपनी जेब से भरते हैं या फिर वो दिल्ली के लोगों के खून पसीने की कमाई होती है जिसे लोग विभिन्न्न टेक्स के रूप मे चुकाते हैं?

यानी की आप उपभोक्ताओं से तो 50 यूनिट्स के 128 रुपये लेते हैं, लेकिन बिजली कंपनीज़ को आप पूरी पेमेंट करते हैं. तो फिर दिल्ली मे बिजली सबसे सस्ती कैसे हो गई जबकि आप तो उसका पूरा भुगतान कर रहे हैं ? 

3. आपने जो भी प्रोजेक्षन्स दिखाई हैं, वो सिर्फ़ 1 से 5 kW और 400 यूनिट्स तक की प्रोजेक्षन्स हैं जिन पर आपकी सब्सिडी लागू होती है. आपको चाहिए था की आप 5kW से उपर के सॅंक्षंड लोड पर भी, जैसे की 6, 7, 8, 9, 10kW, 15kW, 20kW, 25kW, 30kW, 35kW, 40kW, 50kW और उसके उपर के लोड की भी प्रोजेक्षन दिखाते. 

इसके साथ साथ, 400 यूनिट्स क्रॉस होने पर जब सब्सिडी ख़तम हो जाती है, तो उसकी भी,  जैसे की 600 यूनिट्स, 700 यूनिट्स, 800 यूनिट्स, 900 यूनिट्स, 1000 यूनिट्स, 1100 यूनिट्स, और उससे ज़्यादा यूनिट्स का भी प्रोजेक्षन दिखाते. लेकिन क्या आपको ऐसा नही लगता की आपने सिर्फ़ अपनी बात को सच दिखाने के लिए आधे अधूरे सच को गल्त ढंग से पेश किया है? 

4. हैरानगी इस बात की है की इतना सब कुछ गल्त तरीके से पेश करने के बाद भी, सिर्फ़ 1 से 5 kW और सिर्फ़ 400 यूनिट्स तक का प्रोजेक्षन दिखाने के बाद भी, और 1700 क्रोर की सब्सिडी देने के बाद भी, 1 से 5 kW की 400 यूनिट्स की प्रोजेक्षन मे भी आपके अपने रेट बड़े हुए दिखाई दे रहे हैं. आपकी अपनी रिपोर्ट आप को ही आईना दिखा रही है. 

आप अपनी उसी प्रोजेक्षन वाले पेज  को खोलिए और नीचे से शुरू हो जाइए, 1843 (2019) मे से 1370 (2015) घटाते घटाते, उपर की तरफ बडीए तो आप को सॉफ सॉफ दिखने लगेगा की इतने कुपर्चार के बाद भी, इतनी गल्त प्रोजेक्षन दिखाने के बाद भी, 1700 क्रोर की भारी भरकम सब्सिडी देने के बाद भी दिल्ली के लोगों को पहले से ज़्यादा पैसे देने पॅड रहे हैं?

5. हाँ इस पूरी प्रोजेक्षन मे आपने एक बात बिल्कुल सच कही  -  the burden of subsidy has remained constant - क्योंकि सारे का सारा भार तो उपभोक्ताओं के उपर constant हैं.   50 यूनिट्स के लिए लोग अपनी जेब से 128 रुपये दें और बाकी का बिल आप डिस्कोमस को सब्सिडी देकर पूरा कर दो. तो फिर खरबूजा चाकू पर गिरे या फिर चाकू खरबूजे पर, कॅट्ना तो आख़िर खरबूजे को ही है ना. 

अगर आप सही सही  प्रोजेक्षन दिखाते तो सारी सच्चाई सामने आ जाती.  तो क्या इसी लिए आप उस सच्चाई को छुपा गए?

अब वो बात अलग होती की आप दिल्ली के लोगों की सेवा करने की खातिर, डिसकम्स पर दबाव बनाते, उनके टॅरिफ को कम करवाते, ये 8 से 9000 क्रोर की सब्सिडी जो आप 5 सालों मे दे देंगे, उसे बचा लेते तो जाने कितने आधे अधूरे प्रॉजेक्ट्स पूरे हो जाते. जनता की भलाई की खातिर, CAG ऑडिट के लिए सुप्रीम कोर्ट मे अपील करते, लेकिन शायद सत्ता मे आने के बाद ऐसा करना मुमकिन नहीं होता और इसीलिए जनता को अपना दमन चक्र चला कर बदलाव करना पड़ता है.

आपकी अगली रिपोर्ट और प्रोजेक्षन की उड़ीक मे,

B S Vohra
President,
East Delhi RWAs Joint Front
www.RWABhagidari.com

Sunday, June 9, 2019

DELHI मांगे REFUND

Congress & BJP came forward to support our demand of REFUND of Fixed charges of Electricity

Delhi Mange Refund - Refund of Fixed charges of Electricity in Delhi

Delhi Mange Refund - Refund of Fixed charges of Electricity in Delhi

Delhi Mange Refund - Refund of Fixed charges of Electricity in Delhi

BREAKING NEWS: Delhi Mange Refund - Refund of Fixed charges of Electricity in Delhi

Monday, June 3, 2019

Please ask DISCOMs to REFUND the excess collections of Fixed Charges

@ArvindKejriwal दिल्ली के CM श्री अरविंद केजरीवाल जी को बहुत बहुत धनय्वाद की उन्होने बिजली के फिक्स्ड चार्जस को रोल बॅक करने की अनाउन्स्मेंट कर दी. पिछले लगभग 13 महीनों से हम लोग इन फिक्स्ड चार्जस को कम करवाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. अब जबकि CM साहिब का कहना है की DERC ने ये दाम बिना उनको कन्सल्ट किए ही बड़ा दिए थे, इसलिए हम अब ये चाहते हैं की केजरीवाल साहिब, डिस्कोमस को बोल कर जितना भी पैसा ज़्यादा वसूला गया है, उसका रिफंड करवाएँ ताकि दिल्ली के लोगों को रिलीफ मिल सके. 



Thanks. 
B S Vohra. 
@rwabhagidari

True Sewa in the Chilling heat of Delhi

Fixed Charges back to be normal soon - It took almost 14 months of struggle with Delhi Government

Saturday, June 1, 2019

Delhi Assembly elections 2020

प्रिय नागरिक
विधान सभा चुनाव निकट हैं. आने वाले समय में स्थानीय राजनीती और विधायकों के निर्वाचन पर सामाजिक व्यवहार का असर कैसा होगा यह सोचना ज़रूरी है.
यह लेख हमारे समाज की एक कमज़ोरी ; विचारहीन तरफदारी, पर रौशनी डालेगा जो दिल्ली की बिगड़ी हुई शासन व्यवस्था का बहुत बड़ा कारण है.
बिना सोचे समझे, बुद्धि के प्रयोग के बिना कोई पक्ष ले लेना एक आदत सी बन गयी है. सोशल मीडिया के आने से यह मनोवृत्ति और भी बढ़ती जा रही है. किसी भी मुद्दे को विचाराधीन करने से पहले ही बेबाक हो बयान दे देना या फिर पड़ोस में होने वाली हर अहम् बहस पर भाई-भतीजावाद करने लगना, नागरिकों के लिए अपने ही नुक्सान का कारण बनता जा रहा है. दुःख की बात तो यह भी है की हम इस बात पर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं की किस कदर यह सामाजिक परिस्थिति हमारा अपना बेडा ग़र्क़ कर रही है
जब भी कूड़ा करकट, वायु प्रदूषण, गन्दगी, टूटी सड़क, जाम हुई नालियां या फिर सार्वजनिक भूमि पर अवैध अतिक्रमण की बात सामने आती है तो उसके पीछे बहुत हद तक इस प्रवृति का हाथ होता है
गौर फरमाइए, आपके इलाके में अगर नाली बंद हो जाये तो क्या सब निवासी एक ही आवाज़ में बोलेंगे? या फिर अगर सड़क टूटी हो तो क्या सब एक साथ होकर अपने पार्षद, विधायक और सांसद के पास शिकायत ले कर जायेंगे ? हरगिज़ नहीं। साधारण से साधारण नागरिक भी, बिना वजह पार्टीवाद का हिस्सा बन जायेगा. अगर ऐसा नहीं होता तो आपके इलाके की सड़कें, नालिया, और ढलाव साफ़ होते, और सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा होते ही रोक दिया जाता।
हम अक्सर अपनी विफ़लता को राजनीती बोल, नेता के सर पर मढ़ देते हैं लेकिन ध्यान दीजिये, ये बीमारी तो हमने खुद पाली है.
एक उद्धरण के माध्यम से इस मुसीबत पर प्रकाश डालता हूँ
अभी कुछ ही समय पहले दिल्ली के एक क्षेत्र में शराब की दुकान को लेकर कुछ ऐसा ही हुआ. शुरुआत में ऐसा प्रस्ताव की शराब की दूकान रिहाइशी इलाके में खुलेगी, को लेकर वहां के लोगों ने विरोध करना शुरू किया. लोग सड़क पर उतर आये और जम कर रोष प्रकट करते हुए बोले की वह अपने पड़ोस में शराब का ठेका नहीं खुलने देंगे
फिर क्या था, क्षेत्र के विपक्ष के नेता और निर्वाचित प्रतिनिधि भी मैदान में उतर आये. बस यहां से खेल खराब होना शुरू हुआ और समाज की कमज़ोरी बाहर आ गयी. जहां नेताओं ने क्षेत्र के निवासियों पर एक छोड़ दूसरी या तीसरी पार्टी के मेंबर या अनुगामी होने का इलज़ाम लगाना शुरू किया, वहीँ लोगों में बिना सोचे समझे तरफदारी करना शुरू हो गया . कुछ लोग दुबक गए, कुछ अलग -अलग नेताओं के सामने बोलने में आनाकानी करने लगे, और कुछ चुप-चाप समझाने में लग गए की शराब की दूकान पास ही में हो, तो क्या बुरा है? विरोध अलग थलग हो गया.
सच तो यह है की वोट आप किसे भी दें, पड़ोस शराब की दूकान आपके परिवार पर विपरीत असर डाल सकती है । शराब शरीर में घुस कर तरफदारी तो नहीं करेगी की फलां पार्टी के वोटर को कम चढ़ेगी और फलां पार्टी के वोटर को ज़्यादा। या फिर दुकानदार आपके बच्चे से ये तो नहीं पूंछेगा के ‘बेटा तुम्हारे पिता ने किसको वोट दिया क्योंकि उसी हिसाब से में तुम्हें शराब बेचूंगा या फिर नहीं बेचूंगा।’ जब शराब तरफदारी नहीं करेगी और शराब बेचने वाला नहीं करेगा तो लोग क्यों करने लग गए? क्यों इधर उधर भटक कर एक या फिर दूसरी साइड लेने लगे
ऐसा ही कुछ ट्रैफिक प्लानिंग में दक्षिण दिल्ली की एक अति धनवान कॉलोनी में भी हुआ. अब सब लोग ट्रैफिक में उलझे हैं लेकिन बिना सोचे समझे, ज़िद में, राजनितिक साइड लेते हुए घर फूँक तमाशा देख रहे हैं
URJA में हम अक्सर देखते हैं की पब्लिक और RWA अकसर इस तरह साइड लेने लगते हैं की टूटी सड़क, कूड़ा इत्यादि पर किसी भी तरह का कड़ा रुख अपनाया ही नहीं जा सकता। अफसर भी कुछ यूं सोचते हैं “की लड़ने दो इन लोगों को! और हम फ़ालतू में क्यों चक्कर में पड़ें?”
दिल्ली की बैड गवर्नेंस का यह एक बहुत बड़ा कारण है.
समझदारी तो इसमें है की कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जैसे टूटी सड़कें, बर्बाद फुटपाथ, कूड़े के ढेर, सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा, सिक्योरिटी, बह निकलते हुए हुए सीवर, जिस पर हम, चाहे किसी भी पक्ष को वोट देते हों, उस के नेता या उम्मीदवार से साफ़ साफ़ कह दें, की भाई यह नहीं चलेगा। हम किसी भी पार्टी से सरोकार रखते हों लेकिन दो टूक शब्दों में साफ़ साफ़ नेता से कह देना चाहिए कि ‘वोट की बात रही एक तरफ, लेकिन टूटी सड़क, गन्दगी, मच्छर काटने से बीमारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो राज्य सरकार या निगम का काम है, वह तो एक जुट हो कर मांग लीजिये! इसमें क्यों राजनितिक साइड ले कर एक दुसरे का विरोध?
जनता से अनुरोध है की, समझदारी इसी में है की बिना सोचे समझे, तरफदारी बंद कीजिये। विधायक का चुनाव देश व्यापी मुद्दों से जुड़ा नहीं है. पूर्ण रूप से विधायक को क्यों चुनते हैं, आप सब के विधान सभा क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों से जुड़ा है.
आपके इलाके में वैसा शासन है, जैसा आप केअधिकतम क्षेत्रिए निवासी चाहते हैं. जैसी करनी वैसी भरनी; हमारे पूर्वज व्यर्थ ही नहीं कह रहे थे।

Ashutosh Dikshit

Friday, May 31, 2019

The complete list of who got what ministry in the Narendra Modi cabinet:

Shri Narendra Modi 

Prime Minister and also in-charge of:
Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions; 
Department of Atomic Energy;
Department of Space; and
All important policy issues; and 
All other portfolios not allocated to any Minister.

1. Shri Raj Nath Singh — Minister of Defence.
2. Shri Amit Shah — Minister of Home Affairs.
3. Shri Nitin Jairam Gadkari — Minister of Road Transport and Highways; and
Minister of Micro, Small and Medium Enterprises.
4. Shri D.V. Sadananda Gowda — Minister of Chemicals and Fertilizers.
5. Smt. Nirmala Sitharaman — Minister of Finance; and
Minister of Corporate Affairs.
6. Shri Ramvilas Paswan — Minister of Consumer Affairs, Food and Public Distribution.
7. Shri Narendra Singh Tomar — Minister of Agriculture and Farmers Welfare;
Minister of Rural Development; and
Minister of Panchayati Raj.
8. Shri Ravi Shankar Prasad — Minister of Law and Justice; 
Minister of Communications; and
Minister of Electronics and Information Technology.
9. Smt. Harsimrat Kaur Badal — Minister of Food Processing Industries.
10. Shri Thaawar Chand Gehlot Minister of Social Justice and Empowerment.
11. Dr Subrahmanyam Jaishankar — Minister of External Affairs.
12. Shri Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’ — Minister of Human Resource Development.
13. Shri Arjun Munda — Minister of Tribal Affairs.
14. Smt. Smriti Zubin Irani — Minister of Women and Child Development; and Minister of Textiles.

15. Dr Harsh Vardhan — Minister of Health and Family Welfare;

Minister of Science and Technology; and
Minister of Earth Sciences.
16. Shri Prakash Javadekar — Minister of Environment, Forest and Climate Change; and Minister of Information and Broadcasting.
17. Shri Piyush Goyal — Minister of Railways; and
Minister of Commerce and Industry.
18. Shri Dharmendra Pradhan — Minister of Petroleum and Natural Gas; and
Minister of Steel.
19. Shri Mukhtar Abbas Naqvi — Minister of Minority Affairs.
20. Shri Pralhad Joshi — Minister of Parliamentary Affairs;
Minister of Coal; and
Minister of Mines.
21. Dr Mahendra Nath Pandey — Minister of Skill Development and Entrepreneurship.
22. Shri Arvind Ganpat Sawant — Minister of Heavy Industries and Public Enterprise.
23. Shri Giriraj Singh — Minister of Animal Husbandry, Dairying and Fisheries.
24. Shri Gajendra Singh Shekhawat — Minister of Jal Shakti.

Ministers of State (Independent Charge)

1. Shri Santosh Kumar Gangwar — Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Labour and Employment.
2. Rao Inderjit Singh — Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Statistics and Programme Implementation; and
Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Planning.
3. Shri Shripad Yesso Naik — Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Ayurveda, Yoga and Naturopathy, Unani, Siddha and Homoeopathy (AYUSH); and
Minister of State in the Ministry of Defence.
4. Dr Jitendra Singh — Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Development of North Eastern Region;
Minister of State in the Prime Minister’s Office;
Minister of State in the Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions; 
Minister of State in the Department of Atomic Energy; and 
Minister of State in the Department of Space.
5. Shri Kiren Rijiju — Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Youth Affairs and Sports; and
Minister of State in the Ministry of Minority Affairs.
6. Shri Prahalad Singh Patel — Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Culture; and
Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Tourism.
7. Shri Raj Kumar Singh — Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Power;
Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of New and Renewable Energy; and
Minister of State in the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.
8. Shri Hardeep Singh Puri — Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Housing and Urban Affairs; 
Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Civil Aviation; and
Minister of State in the Ministry of Commerce and Industry.
9. Shri Mansukh L. Mandaviya — Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Shipping; and
Minister of State in the Ministry of Chemicals and Fertilizers.

Ministers of State


1. Shri Faggansingh Kulaste — Minister of State in the Ministry of Steel.
2. Shri Ashwini Kumar Choubey Minister of State in the Ministry of Health and Family Welfare.
3. Shri Arjun Ram Meghwal — Minister of State in the Ministry of Parliamentary Affairs; and
Minister of State in the Ministry of Heavy Industries and Public Enterprises.
4. General (Retd.) V. K. Singh — Minister of State in the Ministry of Road Transport and Highways.
5. Shri Krishan Pal — Minister of State in the Ministry of Social Justice and Empowerment.
6. Shri Danve Raosaheb Dadarao — Minister of State in the Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution.
7. Shri G. Kishan Reddy — Minister of State in the Ministry of Home Affairs.
8. Shri Parshottam Rupala — Minister of State in the Ministry of Agriculture and Farmers Welfare.
9. Shri Ramdas Athawale — Minister of State in the Ministry of Social Justice and Empowerment.
10. Sadhvi Niranjan Jyoti — Minister of State in the Ministry of Rural Development.
11. Shri Babul Supriyo Minister of State in the Ministry of Environment, Forest and Climate Change.
12. Shri Sanjeev Kumar Balyan — Minister of State in the Ministry of Animal Husbandry, Dairying and Fisheries.
13. Shri Dhotre Sanjay Shamrao — Minister of State in the Ministry of Human Resource Development;
Minister of State in the Ministry of Communications; and
Minister of State in the Ministry of Electronics and Information Technology.
14. Shri Anurag Singh Thakur — Minister of State in the Ministry of Finance; and 
Minister of State in the Ministry of Corporate Affairs.
15. Shri Angadi Suresh Channabasappa — Minister of State in the Ministry of Railways.
16. Shri Nityanand Rai — Minister of State in the Ministry of Home Affairs.
17. Shri Rattan Lal Kataria — Minister of State in the Ministry of Jal Shakti; and Minister of State in the Ministry of Social Justice and Empowerment.
18. Shri V. Muraleedharan — Minister of State in the Ministry of External Affairs; and Minister of State in the Ministry of Parliamentary Affairs.
19. Smt. Renuka Singh Saruta — Minister of State in the Ministry of Tribal Affairs.
20. Shri Som Parkash — Minister of State in the Ministry of Commerce and Industry.
21. Shri Rameswar Teli — Minister of State in the Ministry of Food Processing Industries.
22. Shri Pratap Chandra Sarangi — Minister of State in the Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises; and Minister of State in the Ministry of Animal Husbandry, Dairying and Fisheries.
23. Shri Kailash Choudhary — Minister of State in the Ministry of Agriculture and Farmers Welfare.
24. Sushri Debasree Chaudhuri — Minister of State in the Ministry of Women and Child Development.

Thursday, May 30, 2019

43% newly-elected Lok Sabha MPs have criminal record: ADR

The BJP has 116 MPs or 39% of its winning candidates with criminal cases, followed by 29 MPs (57%) from the Congress, the Association of Democratic Reforms said.

Nearly half of the newly-elected Lok Sabha members have criminal charges against them, a 26% increase as compared to 2014, according to the Association of Democratic Reforms (ADR).
Of the 539 winning candidates analyzed by the ADR, as many as 233 MPs or 43% have criminal charges.
The BJP has 116 MPs or 39% of its winning candidates with criminal cases, followed by 29 MPs (57%) from the Congress, 13 (81%) from the JDU, 10 (43%) from the DMK and nine (41%) from the TMC, the ADR said.
In 2014, 185 Lok Sabha members (34%) had criminal charges and 112 MPs had serious criminal cases against them. In 2009, 162 (nearly 30%) out of the 543 Lok Sabha MPs had criminal charges and 14% had serious criminal charges, it said.
In the new Lok Sabha, nearly 29% of the cases are related to rape, murder, attempt to murder or crime against women, the non-governmental organization said.
“There is an increase of 109% [in 2019] in the number of MPs with declared serious criminal cases since 2009,” it said.
Eleven winners — five from the BJP, two from the BSP, one each from the Congress, the NCP and the YSR Congress Party, and an Independent — have murder charges against them, the ADR said.
Pragya Singh Thakur, the newly-elected BJP MP from Bhopal, faces terror charges in connection with the 2008 Malegaon blasts. The Bharatiya Janata Party has faced a lot of criticism for fielding her.
Moreover, 29 winners have declared cases related to hate speech, it said.
Dean Kuriakose from the Congress, who won from the Idukki constituency in Kerala, has 204 criminal cases against him, including culpable homicide, house trespass, robbery, criminal intimidation, it added.

Thursday, May 16, 2019

हुआ तो हुआ, बस अब बहुत हुआ

हुआ तो हुआ, बस अब बहुत हुआ. अब तो दिल्ली ट्रॅफिक पुलिस ने भी हाइ कोर्ट को बोल दिया कि दिल्ली की सड़कें और ज़्यादा बोझा ढोने मे सक्षम नहीं हैं. अब तो सरकार को एक फॅमिली एक कार का नियम लागू कर देना चाहिए. साथ के साथ ऑड ईवन भी चाहिए ताकि ट्रॅफिक स्पीड को भी बदाया जा सके.


Saturday, May 11, 2019

The Great Bhaiya ji kahin - Prateek Trivedi - Amazing pack of ENERGY - News18 India - ibn7 & B S Vohra

B S Vohra with Anjana Om Kashyap - AAJTAK - the Admirable personality of Indian Media.

CAST YOUR VOTE ON 12TH MAY 2019

CAST YOUR VOTE ON 12TH MAY 2019

DD News - JANMAT - Vijay Chowk

It's a vicious cycle !

It's a vicious cycle - more sale of cars means - more revenue for Govt - more car loan - more car insurance - more sale of Petrol n Diesel - more requirement of repairs n services - more & more paid parking - more obese - more pollution - more Doctors - more hospitals - more medicine - more dependence on cars - and again more sale of cars. We have been trapped as we always want MORE. Don't you think so?  
Thanks. 
BS Vohra

Vote Delhi - Save Delhi

Sunday, May 5, 2019

Social Media campaign - VOTE DELHI SAVE DELHI

RWA Bhagidari has launched the Online Social Media Campaign - #VoteDelhiSaveDelhi. The campaign has been launched to promote the Voting in a Digital way. Presently every one of any cast n creed, of any economic sector, is engaged on Social Media, be it a Blog, Facebook, Twitter, Instagram or the WhatsApp. So we are targeting our links to generate awareness amongst the voters.

In fact, the situation here is very grim. While the public has to suffer because of Pollution, Traffic jams, Congestion, Waterlogging, Open Dhalav, Smoking Landfill sites, Potholes, Cave-ins, Drinking water issues, ......... the Leaders are not willing to even talk on these issues.

The only remedy is that voters in large numbers must come out to vote on 12th May 2019 so that pressure could be built on them. We are not asking the public to vote for any particular party or candidate, instead, we are asking the masses to COME OUT & VOTE to SAVE DELHI.

You can plan a visit to Kullu, Manali or Shimla any other time. You can plan a rest day on any other Sunday. But this Sunday, i.e. 12th May 2019 must be taken very seriously and so all of us must wait for the day & vote. You can cast your vote to any party, any candidate, we are not concerned with that as its the secret ballot. We just want that you must come out & vote. 

Our message on Social Media is 
#VoteDelhiSaveDelhi 
Pollution, Traffic Jam, Congestion, Waterlogging, Encroachment, Sanitation strikes, Yamuna..............All the issues of #Delhi can be resolved, only & only if you come out & Vote. Shimla can wait, Manali can wait. 
DELHI CAN NOT WAIT ANYMORE. 
VOTE DELHI SAVE DELHI.

Moreover, it's Mother's Day on 12th May 2019. So for the sake of all the Mothers, we must come out & vote. Please support the cause. Share it on your network for the massive reach.

With best regards,

B S Vohra
President,
East Delhi RWAs Joint Front
www.RWABhagidari.com

Thursday, April 25, 2019

अगर दिल्ली को पूरण राज्य का दर्जा नहीं मिल पाया तो क्या दिल्ली मे कोई भी काम नही होगा?


Times of India - This is what you need to do to get our vote - RWAs


Open the 35 year old Mandir of PD Vihar - RWAs demand


पूछो तो सही कि आख़िर दिल्ली वालों को क्या चाहिए?

दिल्ली के चुनावों मे मुद्दे भी तो दिल्ली के होने चाहिए जैसे की पोल्यूशन, ट्रॅफिक जाम, एंकरोचमेंट, वॉटर लॉगिंग, पॉट होल्स, लॅंडफिल साइट्स, गली मोहल्लों मे कूड़े के ढलाव, खुले नाले, डेंगू, चिकनगुनया, और जाने क्या क्या. 



क्या आपको नही लगता की 2019 आते आते, जो असली मुद्दे थे वो कहीं पीछे छूट गए हैं और हम लोग किसी मशीन की तरह ऑपरेट कर रहे हैं. बेशक यह सच है कि लोक सभा मे मुद्दे देश के होते हैं. लेकिन दिल्ली भी तो एक मिनी भारत है. तो फिर दिल्ली के मुद्दों को दरकिनार कैसे किया जा सकता है?

दुनिया की सबसे पोल्यूटेड कॅपिटल बनने के बाद भी कौन सी सरकार इस पर तवज़्ज़ो दे रही है? अब अगर 30 - 40,000 लोग हर साल इस पोल्यूशन से मर भी जाते हैं तो किसको फरक पड़ता है? कोई बोलता है बच्चों के लंग्ज़ खराब हो रहे हैं. कोई बोलता है बच्चों के ब्रेन श्रिंक हो रहे हैं. कोई बोलता है अगले 10 सालों मे ग्रीन हाउस इंपॅक्ट डबल हो जाएगा. 

यकीन मानीएगा, हमारी आने वाली पीडियों का तो शायद भगवान भी मालिक नही होगा, क्योंकि हम खुद अपने हाथों से उनकी कब्र खोद रहे हैं.

ट्रॅफिक जाम तो एक मामूली सी बात है. सरकारों को गाड़ियाँ बेचने से ही फ़ुर्सत नहीं है क्योंकि जाने कितना रेवेन्यू तो इन्ही की सेल्स से या फिर इनमे डालने वाले डीजल व पेट्रोल से मिलता है. और अब तो आपके घर के बाहर खड़ी आपकी गाड़ी पर भी पार्किंग चार्जस लगाने की बात चल रही है. यानी की आम के आम और गुठलियों के भी दाम.

हर गली मोहल्ले की छोटी बड़ी मार्केट्स मे एंक्रोचमेंट हो चुका है. लोगों ने फुटपाथ ही कब्ज़े मे कर लिए हैं. पैदल चलने तक की जगह नही है. सब देख रहे हैं मगर देख कर भी चुप हैं. अब फ़ेसबुक या फिर whatsApp से टाइम बचे तो कोई इस शहर के बारे मे भी सोचे.

दिल्ली के चारों तरफ खड़े कूड़े के सुलगते हुए पहाड़ और गली मोहल्लों मे कूड़े के खुले ढलाव, खुले नाले, फील ही नही होने देते की हम देश की राजधानी मे रहते हैं. और सोने पे सुहागा, पिछले चार सालों मे जाने कितनी बार सॅनिटेशन स्ट्राइक. जाने कितनी बार गली गली मे कचरे के ढेर, बदबू, डेंगू, चिकनगुनया और ना जाने क्या क्या.

गर्मी मे दिल्ली के लोग एक एक बूँद सॉफ पानी के लिए तरस जाते हैं और बरसातें आते ही दिल्ली की हर गली मोहल्ले मे नदियाँ बहने लगती हैं. छोटे छोटे बच्चे भी दो दो फिट के पानी मे से होकर स्कूल जाते हैं.

कहीं सड़कों मे खड्डे तो कहीं खद्डों मे सड़क. सरकारी अस्पतालों का बुरा हाल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट चरमरा रहा है. सालों से चलने वाली दुकानों पर सीलिंग का डंडा. वन टाइम पार्किंग चार्जस लेने के बाद भी कहीं पार्किंग उपलब्ध नहीं. महिला सुरक्षा तो आज भी किसी कोने मे पड़ी हुई सिसक रही है.

आख़िर कौन जवाब देगा कि बिजली के फिक्स्ड चार्जस के नाम पर क्यों डिस्कोमस को मुनाफ़ा दिया जा रहा है? दिल्ली सरकार, पोवेर डिपार्टमेंट या फिर DERC के पास भी हमारे सवालों के जवाब क्यों नहीं हैं? क्यों दिल्ली के CM इस मुद्दे पर हम लोगों से मिलने मे कुरेज करते हैं? 


अफ़सोस इस बात का है कि हमारे नेताओं मे से किसी को दिल्ली चाहिए तो किसी को दिल्ली के पूरण राज्य का दर्जा, लेकिन कोई भी यह पूछ कर राज़ी नही है क़ि आख़िर दिल्ली वालों को क्या चाहिए? ऐसे मे अगर हम लोग भी अपनी आवाज़ नहीं उठाएँगे, तो सोचिए, क्या होगा इस दिल्ली का, 
क्योंकि ये नेता लोग तो सिर्फ़ अपना मेनीफेस्टो डिक्लेर करके ही अपनी ज़िम्मेदारियों से मुक्ति पा लेते हैं?

Saturday, April 6, 2019

Why Delhi is the most polluted capital of the world ?

हेडगेवार हॉस्पिटल - पेशेंट्स का तो सिर्फ़ भगवान ही मालिक है

आज किसी के साथ हेडगेवार हॉस्पिटल जाना पड़ा. एक बार तो लगा ही नही की ये कोई हॉस्पिटल है. अंदर का महोल ऐसा था कि जैसे किसी छोटे से शहेर की किसी छोटी सी डिसपेनसरी मे आया हूँ. लगा ही नही की ये देश की राजधानी का एक बड़ा हॉस्पिटल है.


सबसे पहली मुलाकात हुई उस डॉक्टर से जो की कासुआलिटी मे उपस्थित था. उसका बोलने का लहज़ा ऐसा था की जैसे पत्थर मार रहा हो. उसके कहने पर हम एक दूसरे वॉर्ड मे गए. उधर हमारे पर्पस का कोई डॉक्टर ही नही था. शोर मचाने पर एक डॉक्टर आया लेकिन उसके आते आते एक पेशेंट भी आया जिसका शायद चार महीने पहले टाँग का ऑपरेशन हुआ था एक बाइक आक्सिडेंट के बाद और रॉड़ पड़ी थी. लेकिन उसकी हड्डी ग़लत जुड़ी हुई थी जिस कारण उसको भारी तकलीफ़ हो रही थी. उस पेशेंट का कहना था की प्राइवेट हॉस्पिटल 75 हज़ार माँग रहे हैं जो की उसके पास नही हैं.

खैर मेरे लहजे से डॉक्टर्स को कुछ शक हो गया और वो थोड़ा आक्टिव हो कर काम करने लगे. हमारे साथ गए पेशेंट का भी ट्रीटमेंट हुआ लेकिन डॉक्टर खुद परेशान था. बोलने लगा की वो हड्डी ग़लत इसलिए जुड़ी होगी क्योंकि हॉस्पिटल मे रिक्वाइयर्ड इन्स्ट्रुमेंट्स ही नही हैं. अब बिना इन्स्ट्रुमेंट्स और बिना प्रॉपर दवाइयों के कोई कैसे इलाज करे?

उस डॉक्टर का कहना था की OT मे काफ़ी समय से तीन डॉक्टर कम हैं और इंटरव्यू भी नही हो रहे. लोगों ने बताया की माइनर OT बंद पड़ी है और ऑपरेशन के समय चलने वाली स्क्रीन भी खराब है. डॉक्टर्स का कहना था की दवाइयाँ होती ही नही हैं तो लिखें क्या. लेकिन अगर कोई मीडीया वाला आके पूछेगा तो रिज़र्व मे रखी दवाइयों मे से निकल कर दिखा देंगे की दवाई तो है जबकि पेशेंट्स को देने के लिए दवाई नही है. 

डॉक्टर्स का यह भी कहना था की सिर्फ़ जो दवाई उपलब्ध होती है उसीको लिखना पड़ता है चाहे उससे इलाज मे देर हो जाए. बहुत सी दवाइयाँ तो सिर्फ़ दिखाने के लिए रिज़र्व मे होती हैं, असल मे आती ही नही. लोगों का तो यह भी कहना था की एक्सपाइर होने वाली दवाइयाँ सस्ते दामों पर मंगाई जाती हैं और अक्सर वो दवाइयाँ भी उपलब्ध नही होती.

अब अगर दिल्ली सरकार के बड़े बड़े दावों के बाद भी देश की राजधानी के एक बड़े सरकारी हॉस्पिटल का यह स्टेटस है की वो किसी देहात का अस्पताल लगे तो फिर सरकार की कारय परनाली पर सवाल उठने तो लाजिमी हैं क्योंकि पेशेंट्स का तो सिर्फ़ भगवान ही मालिक है.